मृत्यु
By Alka Singh
आलौकिक, एक दिव्य पुंज वो
मेरे जीवन मे आये थे,
सबके जीवन को कुसुमित कर
हर पल वो मुस्काये थे
अद्भुत व्यक्तित्व के मालिक वो
सब मे घुल मिल जाते थे,
सबकी उम्मीदों पर तो वो
खरे हमेशा आते थे।
निःस्वार्थ, त्यागी और निश्छल मन
सेवा देते वो तन मन धन,
जब आती एक आक्रांत पुकार
चल देते वो घर से निकल
यूँ वक़्त ने ली एक अंगड़ाई
काली आंधी फिर एक आई,
हर संभव कोशिश हम सब की
एक सांस भी उनको दे न पाई।
छोड़ के सबको रोते बिलखते
वो ईश्वर के संग चले गए,
एक बड़ी वीरानी हम सब की
आंखों में वो छोड़ गए|
ईश्वर से अब विनती है कि
इस दुख को सहने की शक्ति दें,
फिर कहीं, किसी जीवन मे
मिलें वो, ऐसी एक युक्ति दें।
By Alka Singh

Comments