मुस्कुराहट
By Mrinalini Gajbe
अजनबी सी लगने लगी हो ,
न जाने क्यों आजकल गुम हो जाती हो ,
रहती थी जो सदा साथ ,
वक़्त बे वक़्त , दिन हो या रात ,
शायद तुम्हे किसी ने हो टोका,
वरना हर सितम भी था तुम्हे प्यारा ..
तुम ही तो थी जिस पर सितमगर फ़िदा हो गया
एक हसीं श्Iम को दिल दे बैठा...
तुम आयी तो बगिया में फूल खिलते है
गर जाओ तो बसंत भी पतझड़ लगता है
माना की दुनिया बड़ी ज़ालिम है
अच्छे को बुरा और बुरे को अच्छा कहती है
मासूम निर्दोषो का कत्ल करती है
बड़ी सफाई से काले कारनामे करती है
पर क्या धरती उन्हें निगल जाती है
या आसमान इन पर टूट पड़ता है
क्या हवाएं अपना रुख बदल लेती है
या पानी का रंग भी लाल हो जाता है
बहुत हो गया , अब समझ भी जाओ,
बहाना कोई नया न बनाओ
तुम्हे किसी वजह की ज़रुरत नहीं
बगिया में खिला एक फूल ही
मुस्कराहट के लिए काफी है
कहते हैं समझदार को इशारा
ही काफी है,,,,
By Mrinalini Gajb

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