मुस्कान के पीछे
By Bhavya Barai
किसी ने कहा
“तुम तो हमेशा मुस्कुराते रहते हो, बहुत खुश लगते हो।”
मैं हँस दिया,
जैसे कोई ज़ख़्म अपने निशान छुपा ले
कपड़ों की सिलवटों में।
उन्हें क्या पता,
हम इतना मुस्कुराते हैं ताकि
किसी को ख़बर न हो
कितनी बार अंदर से टूटे हैं,
कितनी बार रातों ने हमें
सिर्फ़ आँसुओं में जिया है।
हमने सीखा है
रोने की जगह मुस्कुराना,
क्योंकि लोग सवाल नहीं,
बस तमाशे तलाशते हैं।
हर सुबह चेहरा पहन लेते हैं
जिस पर सुकून लिखा होता है,
पर आँखों के नीचे
नींद नहीं,
अधूरे ख्वाब सोते हैं।
कभी आईने से पूछो
कितनी सच्चाई दफ़न है इस चेहरे में,
वो भी चुप रह जाएगा,
क्योंकि अब आईना भी
हमारी मुस्कान से धोखा खा चुका है।
By Bhavya Barai

🤍🤍