मुलाक़ात
By Manasvi Varshneya
जब खुद से मुलाक़ात हुई
तो जाना ख़ामोशी से जानना क्या चीज़ है,
अब दूसरो के साथ नही
ख़ुद के साथ हर दिन अज़ीज़ है।
ख़ुद से मिलकर
एक नए दोस्त को जाना है,
जिस के साथ ज़िंदगी के हर
सफ़र में साथ जाना है।
ख़ुद को पहचान कर
दूसरों से मिलवाया है
इस नए सफर में हर मोड़ पर
ख़ुदको को मज़बूत पाया है।
By Manasvi Varshneya

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