मुट्ठी को बंद कर
By Nisha Dudi
मुट्ठी को बंद कर हम समझते है
आसमान हमारा है,
और इसी में डूब कर हर इंसान ने पूरा
जीवन गुजारा है ,
और फिर भी कहता वह खुद को आसमान का सितारा हैं
लेकिन असल में तो वह एक बेचारा हैं अपनी ही सोच का मारा हैं
यह आसमान ना हमारा ना तुम्हारा हैं यह तो बेचैन लोगों के जीने का सहारा है .....!!
यह ना समझदार लोगों का किनारा हैं यह तो जहां मैं इधर-उधर भटकता हुआ एक आवारा हैं
जो दुनिया के जो दुनिया भर के खुद जैसे आवारा लोगों का यार हैं
यह आसमान जो कभी हरा,कभी नीला, कभी जैसे समुद्र का एक किनारा हैं ,
वह तुम्हारी खूबसूरत आंखों में कैद खूबसूरत नजारा हैं,
जो जिंदगी को जीने का एक नया सा सहारा हैं ,
जो मुट्ठी में कैद ना होगा कभी ,
यह ना तुम्हारा ना हमारा हैं ।।
यह तो बस कुछ बेचैन लोगों के जीने का सहारा.......।।✨✨
By Nisha Dudi

Comments