मुझे पीने दो
By Mayank Nema
दददबहुत हैसीनेमें,
अब मज़ा नही
तुझ बबन जीनेमें,
तेरेबदए जख्मों को
जऱा सीनेदो,
मुझेपीनेदो।
पहलेतूहोती थी
मेरी हर श़ाम में,
अब बीत रह़ा वक्त
बकस्सों और ज़ाम में,
इस दीव़ानेको कहीं तो ऱाज-ए-बदल कहनेदो, मुझेपीनेदो।
मेरेमौन मेंथ़ा तू
लहजेमेंभी,
कसीदों मेंथ़ा तू
मेरेशशकवों मेंभी,
पर अब बस...
मुझेऔर मेरी तनह़ाई को स़ाथ रहनेदो,
मुझेपीनेदो।
च़ार कदम बस चली तूस़ाथ बिर मुुँ ह मोड़ ललय़ा तूने, बैठ़ा थ़ा मैंवहीं टूट कर
मुड़ कर भी न देख़ा तूने, अब...
मुझेआसम़ान मेंउड़़ानेव़ाली ह़ाल़ा सेमोहब्बत करनेदो, मुझेपीनेदो।
अब वजह नही हैजीनेकी तो वजह ढूुँ ढ ली पीनेकी, मेरी नज़्मों मेंही अब हम़ाऱा इश्क़ जज़िं द़ा रहनेदो,
भरनेदो शब्दों सेप्य़ाल़ा लफ़्जों केनशेमेंरहनेदो, मुझेपीनेदो।
By Mayank Nema

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