मुखौटा
By Hemalatha Swaminathan
दिन तो कट जाता है गुफ्तगू में
ये रात है जो अपने सन्नाटे में
हमें खुद से मिला जाती है!
लोग अपनी सुना जाते है,मेरा हाल कोई न पूछता,
या पूछकर, जवाब खुद ही तय कर लेता!
यह रात है जो सवालों का परचा लिए,
हमारी सूनी आँखों में ढूंढ़ती है मायने !
यह रात है जो हमारा सिरहाने बैठे,
दबी हुई सिसकियों के उभरने का इंतज़ार करती है,
दिन के हँसी को चीन जाती है!
"ये बहरूपिया कल कौन सा मुखौटा पहनोगे?"
यह पूछ जाती है !
By Hemalatha Swaminathan

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