मुक्तक
By Surendra Kumar Sharma
(1)
जैसे हर घर पावन गंगा |
शहर,गली हर गाँव सुरंगा |
बाँटें अपना प्यार सभी को-
घर-घर में लहराये तिरंगा |
(2)
अमृत उत्सव चलो मनायें |
आजादी पर बलि-बलि जायें|
भारत माँ के उठो लाड़लों-
चलो तिरंगा हम फहरायें |
(3)
मातृभूमि के मनहर छौनों,
तीन रंग बरसा दो |
भारत माँ के भाग्य विधाता,
हर घर को सरसा दो |
ऐसी अलख जगादो घर-घर,
हर आँगन मुस्काये -
देशप्रेम के गीत अधर रख,
सबके मन हर्षा दो |
(4)
मेरे देश तुम्हारी जय हो |
नहीं लेश भर सरगम क्षय हो |
प्राणों में गूँजें सुर इसका -
भारत माँ की जय-जय जय हो |
By Surendra Kumar Sharma

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