माशूका – ऐ - मौत
Updated: Oct 1, 2024
By Shubham Kabra
जब जब धड़कनो पर ध्यान देता हूँ,
मौत सामने पुकारती नज़र आती हैं |
लोगो को मौत के जिक्र पर यमराज नज़र आता है,
मुझे तो मौत माशूका की तरह की लगती है |
ये वो माशूका है, जो बार बार इशारे करती है,
और अगर सर उठाकर नज़रें मिला लो, तो दूर भाग जाती है |
कभी कभी लगता है ये हमें कश्मकश में उलझाने के लिए ही बनी है,
न पकड़ सकते है, और न देख सकते है |
बस एक दिन अचानक आएगी,
और हमें दुनिया से छीन ले जाएगी |
मुझे इसके इशारो से फर्क ही कहाँ पड़ता है,
मैं तो इससे आँखें मिलाकर खेलना चाहता हूँ,
याद नहीं कभी डर लगा भी था क्या,
इसलिए किश्तों में नहीं, एक झटके में मरना चाहता हूँ |
घूमा फिराकर असमंजस में रहना मुझे पसंद नहीं मेरी मौत,
इसलिए आज अभी अपने आने का वक़्त बता दे,
तुझसे मिलने में कोई बेताबी नहीं, और डर भी नहीं है
पर तेरे आने से पहले, अपनों पर अपनी पहचान छोड़कर जाना चाहता हूँ |
By Shubham Kabra

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