माना कि तुमसे बहुत लङती हूँ मैं
By Smita Chaudhary
माना कि तुमसे बहुत लङती हूँ मैं
मगर प्यार भी बहुत करती हूँ मैं ।
जैसे साँस रुकने से डरते हैं सभी
ऐसे तुम्हे खोने से डरती हूँ मैं।
दिन मेरा कैसा भी गुजरा हो मगर
पूरा तभी होता है, जब तुमसे बात होती है।
माना कि तुम्हे बुरी लगती हैं बातें मेरी
फिर भी तुम्ही से साझा करती हूँ मैं।
ऐसा नहीं है कि मुझमे हिम्मत नहीं है,
जमाने से लङने की ताकत नहीं है
मगर तुम्हारे आस पास होने से
सुरक्षित सा महसूस करती हूँ मैं।
By Smita Chaudhary

Beautiful
🧿