मान लिया!
By Saksham Raj
तेरे प्यार का नहीं हक़दार मान लिया
मैं नहीं हो सका तेरा यार मान लिया
देर से समझा पर समझ तो गया था
वक्त का बहाना इस बार मान लिया
इश्क़ के इरादे से हाथ बढ़ाए थे मैंने
दोस्त माना तूने हर बार मान लिया
छोड़ जाने भी दे अब फ़िज़ूल की बातें
नहीं है तुझे मुझसे प्यार मान लिया
तेरे बिना चैन भी मुझे मुनासिब कहां है?
मैंने तुझे अपना कारोबार मान लिया
थक रहा हूं उससे प्यार करते करते 'क़ाबिल'
वो होगा अब किसी का बेशुमार मान लिया
By Saksham Raj

Waah!! Qaabil kya likha hai ✍🏻😭
Natural as always ✨
Nice
Wah wah dil chu gya 🙌❤️
The emotion is present, but never forced. That’s what makes it beautiful.