मातृत्व
By Kavita Chavda
बोहोत दिनों से नेहा डांस क्लास नहीं आई थी। अकसर दोस्तो को मिलने की जल्दबाजी में मैं क्लास के बाद तुरंत निकल जाती हूं। आज सोचा जाने से पहले नेहा की खबर पूछूं। उसके कमरे में गई तो देखा वो टेडी बियर पकड़े उसके सामने देखती हुई हल्के हल्के रो रही थी। में उसके पास जाकर बैठी और पूछा क्या हुआ। उसने एक लंबी मुस्कान के साथ मुझे गले लगाया और कहां क्या में कुछ देर यूंही रह सकती हूं। मैंने उसे अपनी बाँहों में कस के जकड़ा की तब ही वो चीख पड़ी, अरे इतनी जोर से नहीं। मुझे नेहा का बर्ताव कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसके चेहरे पर एक अलग चमक थी। में कुछ पूछूं उसके पहले उसने मेरा हाथ लेकर अपने पेट पर रखा और हल्के से कहां, में प्रेगनेंट हूं और तुम पहली इंसान हो जिसे में ये बता रही हूं। मुझे समझ नहीं आ रहा था मैं क्या बोलूं। मेरे अंदर सबसे पहला विचार यहीं आया की अब ये लड़की का क्या होगा पर में चुप रही क्योंकि मैं इस पल उसे मायूस नहीं करना चाहती थी। वो अपनी खुशी में यूंही बड़बड़ाए जा रही थी की उसे एक महीने से कैसे कैसे अनुभव हो रहे है जब की मेरे अंदर दस सवाल उठ रहे थे कि वो लोगों को केसे बताएगी, उसका ख्याल कोन रखेगा, उसके बॉयफ्रेंड ने उसकी जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया तो क्या होगा। वो जितनी खुशी जाहिर किए जा रही थी मेरी फिक्र उसके लिए उतनी ही बढ़ रही थी। उसने कहां वो ये खुशी गंगा मां के दर्शन कर के और सांई घाट की मैगी खा के मनाना चाहती है। मैंने अपने दोस्तो को मेसेज कर के कहां की में आज नहीं आ पाऊंगी मिलने।
नेहा ने पहले घाट पर फूल चढ़ाए फिर हमने मैगी और कोल्ड काफी ऑर्डर करदी। घाट पर बैठे मुझे चुपचाप गंगा मां को निहारते हुए देख उसने पूछा की में ठीक तो हूं। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने तुरंत मेरी सारी फिक्र उसे बता दी। वो कुछ देर चुप रही और फिर कहां की यार मैंने ये सब नहीं सोचा, मुझे बस ये पता है कि जिंदगी में पहली बार मुझे जीने की उम्मीद महसूस हो रही है। मुझे नहीं पता मेरे मां बाप कोन थे, मुझे मेरा बचपन नहीं याद, मुझे बस इस अनाथ आश्रम में जी हुई दुनिया का ही पता है और मेरे पहले प्यार का अनुभव, रोहित के साथ। वो मेरा पहला दोस्त था इस आश्रम में और एक वहीं है जिसके साथ मैं खुल पाती हूं। मेरे अंदर बन रही ये जिंदगी को शायद में वो जीवन दे सकू जो मुझे नहीं मिला। मुझे बस इतना ही पता है। इतनी देर में लीला ने आवाज़ लगाई की ऑर्डर तैयार है।
ऑर्डर लेकर आते हुए मैंने नेहा को घाट पर जाम करते कुछ गिटारिस्ट्स की धुन पर नाचते हुए देखा। मैंने जिंदगी भर अपनी कैरियर ओरिएंटेड मां को मातृत्व को एक बोझ की तरह उठाते देखा है। मातृत्व को इस नज़रिए से जानना अपने आपको उस बोज के तले दबे एहसान से रिहा करने जैसा महसूस हुआ। कोल्ड काफी नेहा को पकड़ाते हुए में भी उसके साथ नाचने लगी। कुछ देर में और लोग हमारे साथ जुड़ गए। इस सामूहिक आनंद में जुमते हुए यूं लगा की जिंदगी भर जिस रिहाई की तलाश में भटक रही थी वो हासिल हो गई। एक साल पहले अपनी नौकरी और शहर छोड़ कर मैं यहां घूमने आई थी और यहीं बस गई। पूरी दुनिया से मां गंगा के पास लोग मुक्त होने आते है, उस शाम यूं लगा जैसे मेरा ऋषिकेश आना सफल हुआ।
By Kavita Chavda

Comments