मां में कहां जायूं
By Priyanka Choudhary
मां में कहां जायूं
किस तरह खुद को बचायूं
बाहर जाती हूं तो हर जगह कोई ताक रहा है
घर के अंदर भी अब अपना ही कोई झांक रहा है
घर के किस कोने में जाके खुदको छुपाऊं
मां में कहां जायूं
क्यों मुझे कोई इंसान नहीं समझता
चलता फिरता बस एक शरीर है दिखता
क्यों मेरे आंसुओं से उनका दिल नहीं पसीजता
मां क्यूं मेरा शरीर दो कोड़ी में बाजार में है बिकता
कब तक अपने आंचल में मुझको छुपाएगी
एक दिन तो तू भी थक के गिर जायेगी
फिर कोई नजर मुझे नोच नोच के खा जायेगी
और तू मेरी वो हालत पर रो भी नही पाएगी
इससे अच्छा तो में खुदको दफनायु
मां में कहां जायूं
By Priyanka Choudhary

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