माँ-भारती
- Hashtag Kalakar
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By Sangeeta Singh
माँ-भारती दो-सौ सालों तक
परतंत्रता की बेड़ियों में,
हिंद के नभ में
काला बादल छाया।
अतीत में अंकित है काली स्याही से
अन्याय, क्रूरता की कहानी ।
बाग-बगीचे उजड़ रहे थे,
अदृश्य हो गई स्वर्ण चिड़ियाँ।
धर्म-संस्कृति पर
प्रलोभन का जाल छाया,
हस्तशिल्प, कृषि, कला पर
दमन का बादल मंडराया।
कर, छल, बल, ढोल बजाकर
नर्तन करता,
सृष्टि की दृष्टि विस्मित ना हो पाएगी।
जन-जन में भेद-नीति से
विद्रोह का स्वर गूंज उठा।
आजादी की चिंगारी सुलग गई।
भारत माता को आज़ाद कराने
असंख्य वीर सपूत
तन, मन, धन से समर्पित हो गए।
देश-भक्ति की भावना से लाल-
आज़ादी के हवन-कुंड में
अर्पित हो गए।
वीर सपूतों ने
अहिंसा, त्याग, बलिदान, शौर्यता से
भारत-माता को आज़ाद करवाया ।
By Sangeeta Singh

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