माँ की मोहब्बत
Updated: Jul 30, 2025
By Mohammad Sakib
जब भी मुरझाता हमारा फूल सा चेहरा..
माँ को लगता इस बात से सदमा गहरा..!!
वो अपने हिस्से की चीज़ें भी मुझे देती थी..
मैं उनका लाड़ला सबसे छोटा जो ठहरा..!!
माँ के बिन रोशन मकां भी सियाह लगता हैं..
रात-दिन होता था उनके कदमों में सुनहरा..!!
बड़ी ख़्वाहिश थी उन्हें डोली में बहु लाने की..
वो देख ना सकीं मेरे सर पर सजा सेहरा..!!
उम्मीद नहीं मिलने की ये सोच रुक जाता हूँ..
हो एक आस अगर तोड़ दूँ हर क़ैद हर पहरा..!!
By Mohammad Sakib

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