माँ कि उल्टी पुलटि Coffee
Updated: Jul 30, 2025
By Akshita Goyal
बचपन में बाहर की coffee पीने का शौक चढ़ा
तो हमने आसपास के cafes का मुआयना करा
पता चला कि Starbucks जाने में लगते हैं हजार bucks
वो हजार bucks मांगे माँ से, तो उसने कहा, चल भाग यहां से
फिर प्यार से बोली, बाहर क्यूँ जाना है,
ये तो असानी से घर मे ही बन जाना हैं
माँ के हिसाब से दोनों में कोई फर्क नहीं था
ऐसा नहीं है कि हमारे पास जवाब में कोई तर्क नहीं था
बात यू थी कि, पैसे तो नहीं दिये माँ ने
पर संस्कार दिये थे
तो माँ के आगे हमने इसलिए होंठ सीये थे
'आप कैसे बनाओगी, उस पर तो cream से design बनाया जाता है
आपको पता है वो ये बिल्ली, खरगोश, बतख कैसे बनाता है'
मैंने भी ऐसे ही जवाब की तैयारी कर रखी थी
पर चुप रहे, ये संस्कार नाम के दर्जी की सिलाई बहुत पक्की थी
माँ ने, अपने हाथों को ही espresso machine बना दिया
Coffee-चीनी-पानी को काटे से फेंट के cream बना दिया
फिर गंगोत्री से उल्टी nescafe बहाई गई
Cream से coffee, और उस पर design coffee powder से बनाई गई
माँ चुटकी भर coffee में design ढेर सारे बना देती थी
कभी नाम लिखती मेरा, कभी चांद सितारे बना देती थी
आज मैंने पहली बार, बाहर की design वालीं coffee पी
जो कि वाक़ई में, घर वालीं coffee से बहुत अलग थी
अब अगर माँ ने फर्क पूछा, तो मैं उनसे कहूँगी,
की माँ, ये जो बाहर वालीं coffee थी ना
उसमे नीचे coffee और उप्पर cream का सीधा सीधा मिलन था
और अपनी कॉफी थी उल्टी पुलटि,
पर उसमे तेरा मेरा ढेर सारा सीधापन था
By Akshita Goyal

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