माँ (Maa)
Updated: Jul 30, 2025
By Sameer Agarwal
कभी सड़क ख्याबों की टूटी है,कभी हिम्मत है टूटी मेरी,
टूटा नही जो वो बस तेरा ही यकीन था।
जलती रेत पर चलकर पहुंचा हूं यहां तक,
आखों में इंतज़ार का स्वाद हर पल नमकीन था।
मिला वो सभी जो मांगा कुछ कभी तुझसे,
मैं कहां तेरी ममता से रहा महरूम था।
जिंदगी की जलती धूप में छांव मिलेगी तुझ संग,
और कुछ ना सही मुझे पर इतना मालूम था।
हिफ़ाज़त मिली है, उम्मीद मिली है तुझसे,
मेरे हर दर्द का तेरे पास सकून था।
हमेशा मिलनी चाहिए जिसे नसीब में खुशियां,
पर हुआ जो खुदा को शायद वही मंजूर था।
ना कहा तुझसे ये कभी, ना जता पाया हूं मैं,
मेरे हजार गुनाहों में एक ये भी कसूर था।
By Sameer Agarwal

Comments