महाभारत
By Mrs Paramjeet Kaur Jagir Singh Thuain
निरंतर निर्बंध चलने वाला संघर्ष अर्थात महाभारत,
अपने संग लेकर आता कभी उत्थान,कभी पतन।
उसमें नाम बदल जाते ,चेहरे भी बदल जाते हैं,
पर चरित्र वही ,भावनाएँ वहीं और संघर्ष भी वही रहते हैं।
इस महाभारत का मुख्य पात्र ,अर्जुन अर्थात सामान्य मनुष्य,
जिसे जीवन के कुरूक्षेत्र में सदैव अपेक्षित है मार्ग दर्शन ।
भरपूर सामर्थ्य ,धर्म ,ईश्वर उसके पक्ष में होने पर भी,
सँसार में कदम रखते हुए सदैव घबराता है,आतंकित होता है।
हमारी दृष्टि समक्ष अश्वत्थामा जैसे मनुष्य भी आते हैं,
जो अर्धसत्य के जाल में फँसकर भटकते रहते हैं।
असंख्य आत्मविश्वासी तरुण अभिमन्यु सदृश इस विश्व में,
महात्वाकांक्षाओं के विचित्र चक्रव्यूह में प्रवेश कर जाते हैं।
अनपेक्षित बाधाओं का सामना करते,जूझते रहते परन्तु,
बाहर नहीं निकल पाते और उसी में प्राण उत्सर्ग कर जाते हैं।
सर्वश्रेष्ठ,बुद्धिमान ,निर्भीक,सपष्ट वक्ता विदुर भी हैं,
जो तथाकथित जन्मजात त्रुटियों के कारण ,कारागृह मे सडते है।
इधर देखिए निरपेक्ष सत्य का अवलम्बन होने पर भी,
दूरदृष्टा बुद्धिमान संजय निष्क्रिय बैठ सत्य देखता और दिखाता है।
असंख्य गांधारियाँ आँखों पर ममता की पट्टी बांधकर,
सब कुछ देखते समझते हुए भी अंधी बनी रहती हैं।
दुर्योधन ,दु:शासन जैसे पुत्रों के दुश्कृत्यों पर पर्दा डालती रहती हैं,
और दिनोंदिन निर्भया जैसी घटनाएँ घटित होती रहती हैं।
तेजोमय व्यक्तित्व के धनी दानवीर कर्ण,
कुसंगति में पडकर अपनो के ही हाथों मारे जाते हैं।
आज भी कई द्रौपदियों का सरेआम चीर हरण होता है,
क्या घर,क्या बाहर,क्या गली ,क्या मुहल्ले,
सब जगह उनकी रूह का दामन तार-तार होता है,
पर उनकी पुकार,मिन्नतों पर कोई कृष्णावतार नहीं होता।
फिर एकलव्य जैसे गुरूभक्त,परिश्रमी,आत्मविश्वासी युवक,
समाज में व्याप्त विषमताओं की बलि चड जाते हैं।
किसी कवि ने सत्य ही कहा है—भविष्य कभी भी वर्तमान से कभी स्वतंत्र नहीं
होता क्योंकि महाभारत कभी समाप्त नहीं होता,
वह सदैव निरंतर चलता रहता है।
कभी विचारों का ,कभी भावनाओं का तो कभी रिश्तों का
और यह महाभारत मानव -जगत को,
भूत,वर्तमान,भविष्य के धागों में उलझा के रखता है,
फिर प्रभु की मृत्यु प्रतिपल कहीं न कहीं होती रहती है।
और सबके हृदयों में घनघोर अंधकार फैलता जाता है,
फैलता जाता है,फैलता जाता है।
इस तरह महाभारत चलता ही रहता है…..चलता ही रहता है…..चलता ही रहता है।
By Mrs Paramjeet Kaur Jagir Singh Thuain

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