मल्हार
By Kumud Limbaji Kadam
घन से कडकता उजाला हो दिल में प्यार हो
जीवन का मेरे तुम्हारे हर सपना साकार हो
पतझड बवंडर और सारे बेकार हो
दिल में रहने वाले का हमेशा दिदार हो
मल्हार कि गुहार ऐसी ! धरती पर स्वर्ग हो
तुम मेरे दिल में हो तुम मेरे साथ रहो
आकाश में बादल हो प्रेम भरा आंचल हो
तेरे मेरे इश्क कि कथा न कभी ओझल हो
तुफान कि गोद हो मंजर चाहे दलदल हो
तेरे मेरे इश्क कि बयानी जब़ान पर सबके हरपल हो
मल्हार कि गुहार ऐसी ! धरती पर स्वर्ग हो
तुम मेरे दिल में हो तुम मेरे साथ रहो
ऋतुराज के समीप मेघ घने आज हो
तेरे मेरे सर पर प्रेम का ही ताज हो
दिल में प्रेम और होंटो पर नाज हो
तेरे मेरे इश्क कि कहानी सबसे खास हो
मल्हार कि गुहार ऐसी ! धरती पर स्वर्ग हो
तुम मेरे दिल में हो तुम मेरे साथ रहो
जमींन को आस्मान से जैसै मिलन कि प्यास हो
मैं मेरे इश्क के मेरा इश्क मेरे पास हो
मल्हार कि सावन की धार से तकाज हो
तेरा मेरा इश्क हमारे जीवन का सरताज हो
मल्हार कि गुहार ऐसी धरती पर स्वर्ग हो
तुम मेरे दिल में हो तुम मेरे साथ रहो
मल्हार कि बौछार पर हमारा दिल पार हो
दिल में तेरे मेरे हमारे जीवन का आधार हो
छोटा सा संसार हो खुशियों कि भरमार हो
तेरे मेरे इश्क में सिर्फ प्यार और प्यार हो
मल्हार कि गुहार ऐसी धरती पर स्वर्ग हो
तुम मेरे दिल में हो तुम मेरे साथ रहो
By Kumud Limbaji Kadam

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