मन चंचल
By NIDHI PALIWAL
बाहर अपने खोजे जाए भीतर बसा संसार, इससे पूछे उससे पूछे मन चंचल ये करे विहार। जग की इसको बहोत पड़ी है खुद से नाता टूट गया,
क्यों के उत्तर से विचलित है मन ही खुद पर करे प्रहार। इससे पूछे उससे पूछे मन चंचल ये करे विहार। उस दुनिया है उलझा इस दुनिया का बोध नहीं, खो रहा है इन सबमें इस प्रहर का मल्हार। इससे पूछे उससे पूछे मन चंचल ये करे विहार।
By NIDHI PALIWAL

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