मन के बादल
By Vijeta
सबने एक सुंदर दृश्य देखा
बादलों को पहाड़ो से मिलते देखा |
क्या बादल को चोट लगी होगी?
क्या पहाड़ो ने अकड़ दिखाई होगी?
क्यूँ टूट कर बिखर गया वो बादल ?
कुछ तो उसके मन को ठेस पहुंचाई होगी I
पहाड़ तो दिखता है अडिग अटल
सबको लगती है ये बात सरल
क्या किसी ने दोनों के दृष्टिकोण से बात सोची होगी ?
या कितना मनमोहक दृश्य कह, फोटो खीची होगी?
बादल वो टूट कर जब जमीं पर आया होगा ,
धरती की मिट्टी को अपना हाल सुनाया होगा I
मिट्टी ने क्या साथ उसका निभाया होगा ?
या ख़ुशबू बन कर हर किसी को सुनाया होगा?
जब बादल किसी व्यक्ति से था टकरा रहा ,
आँखो से बह रही थी उसके अश्रु की धारा I
शायद छू गई बादल की बातें उसके मन को,
अश्रु मिल गए नदी में , तैयार करने एक नए बादल को I
नई शुरुआत से था बादल ऊँच आकाश में उड़ रहा ,
हर किसी की प्यास बुझाने को, आज वो धरा पर बरस रहा I
ख़ुद की ख़ुशी से सबके आँगन को वो महका रहा ,
डाली डाली पर हर पंछी को था वो चहका रहा|
By Vijeta

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