मणिपुर की आग
By Banarasi
ये मणिपुर नही,
मेरा देश जल रहा है।
भारत मां की अस्मिता को,
पल पल छल रहा है।
गुलदस्ते जैसा मेरा देश,
उपद्रवियों की धमक से उजड़ रहा है।
इंसान अपनी इंसानियत को खोकर,
अपनों का ही गला घोट रहा है।
आग की लपटों में जलती इच्छाएं,
धरोहरों की कहानियों से भरोसा खो रहा है।
उच्छ्रय की ओर सब दौड़ रहे,
बिन तिरंगा स्तंभ स्थूल खड़ा है।
लहू से सींची ये पावन धरती,
हो आधारहीन सब ढह रहा है।
समृद्धियों से भरा मेरा देश,
अपना भेष बदल रहा है।
ये मणिपुर नही, मेरा देश जल रहा है।।
संघर्षों की धूप में पालित विकास की काया,
आज अपने ही अक्स को खोज रहा है।
आतंक के भय से घिरा नागरिक,
अपनी मिठास को खो रहा है।
विशाल रूपांतरण का था जो सपना,
वही आज अस्थिर धुंध में खो रहा है।
दीए बुझ गए है प्रतीक्षा के,
उम्मीदों का दोहन हो रहा है।
शांति की तलाश प्यासे दिलों से,
सद्भावना की लागत बंधुआ बना रहा है।
अनिश्चितताओं में तैरती देश की तकदीरें,
एकता के नदी में शांति का उद्गम खोज रहा है।
इस स्वार्थ रूपी ज्वाला से,
मेरे देश का नागरिक झुलस रहा है।
धर्य और अटलता का साक्षी भारत,
विचारों में बदले धृष्टता को झेल रहा है।
ये मणिपुर नही, मेरा देश जल रहा है।।
धूमिल होता इससे देश का गौरव,
अपनी ही श्वास को खोज रहा है।
राष्ट्रीयता की दृष्टि से हट कर,
जातियता के कुचक्र में डोल रहा है।
संघर्ष से समर में परिवर्तित हो,
आपसी कटुता का भाव बो रहा है।
स्वर्णिम भविष्य के संकल्प को त्यागकर,
अंधकार के दरवाजे खोल रहा है।
विकास के पथ से भटक कर,
पतन के झूले में लटक रहा है।
भूमि के शीश में छिद्र दिखा कर
अपनी ही संस्कृति को भाप बना रहा है।
आतंकवाद के अंधेरे में घिरा,
वीरता और साहस का नशा बह रहा है।
जनहित की बातों को भुलाकर,
विधायिका में विवादों का मेला चल रहा है।
ये मणिपुर नही, मेरा देश जल रहा है।।
ये संघर्ष करने का नही,
एकजुट होने का समय है।
भेदभाव को भुलाकर,
सबको साथ चलने का समय है।
जागो जागो मेरे देश के नागरिक,
आज तुम्हारे जागने का समय है।
परम प्रयास कर एक दूसरे का बन सहारा,
हर मुश्किल आसान करने का समय है।
दिलों की बेरंगी को मिटा कर,
विकास की महत्वता बताने का समय है।
ना जलने दें भाईचारे को,
अभिमान राष्ट्र का विकृति से बचाने का समय है।
आतंकवाद को नाकाम कर,
अंदर के भय को हराने का समय है।
अहिंसा के पथ को अपनाकर,
सभ्यता की ओर बढ़ने का समय है।
क्योंकि
ये मणिपुर नही, मेरा देश जल रहा है।।
उठो, जागो,आओ साथ मिलकर खड़े हों,
भविष्य के लिए इक संकल्प बनाएं।
अडिग हौसलों से लड़कर,
विकास की तरफ चलो कदम बढ़ाएं।
विकास और सद्भावना के पथ पर चलकर,
मणिपुर ही नही, देश को बिखरने से बचाएं।
समृद्धि की सीढ़ी एक साथ चढ़कर,
आओ सब मिलकर बेहतर भविष्य की धारा बहाएं।
उपद्रवियों को जड़ से उखाड़ फेंक कर,
समृद्धि और शांति के सपने सबको साकार कराएं।
विकास की राह पर बन अग्रणी,
मिलकर देश का मान बढ़ाएं।
देश की अखंडता की खातिर,
बनारसी ऐसे ही अपनी कलम चलाए।
मिटाकर द्वेष एक दूसरे से,
आओ! अपने भारत देश को स्वर्ग बनाएं।
जय हिंद! जय भारत!
By Banarasi

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