मछली रानी और बाज़ का बच्चा
By Tara Chand Saini
एक थी मछली रानी नन्ही सी मछली रानी एक समुद्र में रहती उसके जल में तैरती खूब तैरा करती खूब नहाती खूब फुदकती खूब मचलती खूब गोते लगाती खूब धमाचौकड़ी मचाती।
सबकी प्यारी थी मछली रानी वह नन्ही सी मछली रानी वह सबसे मिलती सबसे बतलाती सबसे मिलकर खुश होती वह सबकी चहेती वह नन्ही सी मछली रानी ऐसी थी वो नन्ही प्यारी सी मछली रानी।
तैरते तैरते एक दिन वह जा पहुंची किनारे तब देखा उसने जल से बाहर की दुनिया एक अलग ही दुनिया जो थी बिल्कुल अलग उसकी जल की दुनिया से उसकी दुनिया में पानी ही पानी था और क्या था इसके सिवा! देख बाहरी दुनिया को मछली रानी का मन मचल गया वह देखना चाहती थी एक नई दुनिया अपनी दुनिया से बिल्कुल जुदा एक दुनिया तैरते हुई लौटी वह घर अपने शीघ्र बताई मम्मी पापा को अपनी इच्छा बाहर घूम आने की अपनी इच्छा सुनकर वे घबराकर बोले ना ना वहां मत जाना!! उस दुनिया में अपनी दुनिया का दायरा छोड़कर उस दुनिया में जाने का दुस्साहस मत करना वह दुनिया हमारी नहीं है नहीं है वह हमारे लिए है वह बड़ी मुश्किल वाली तुम वहां ना तो तैर पाओगी और ना तुम चल पाओगी ना तुम सांस ले पाओगी और शायद तुम्हे जल्दी ही कोई अपना आहार बना ले....
मछली रानी ठहरी मछली रानी सबके कहने पर भी वह नहीं मानी उसे तो तमन्ना थी बाहर घुम आने की वह तो ठहरी अपनी धुन की पक्की जो भी वह चाहे वह करना चाहती
उसकी मां ने आंसू बहाते हुए कहा "मत जाओ मेरी बेटी वहां तुम वहां जीवित ना रह पाओगी शायद तुम लौट भी नहीं पाओगी!"
"मत जाओ मेरी प्यारी बहना" भाई ने उसके रोते हुए कहा बहन ने गले लिपटते हुए कहा "मत जाओ नन्ही छोड़कर यह जहां" एक बुजुर्ग कछुए ने कहा "प्यारी मछ्ली बिटिया मानो हमारा कहना अच्छा नहीं है वहां जाना।" "हम खुश है यहां पानी में रहकर बाहर जाओगी तो पछताओगी" अन्य सभी जगह साथी मिलकर बोले।
मछली रानी साहस से सांस भरकर बोली "तुम फिक्र ना करो मैं थोड़ा घूम फिरकर लौट आऊंगी शीघ्र तुम लोगों के पास।"
लाख मना किया सभी ने पर मछली रानी ठहरी नन्ही मछली रानी उसे तो जाना था वहां किनारे तक वह पहुंच गई।
पीछे पीछे आए सभी उसको विदा करने सभी की आंखों में थे आंसू नन्ही मछली रानी की जिद्द के आगे वे थे सभी बेबस।
नन्ही मछली रानी ने लंबी छलांग लगाई और वह पानी से बाहर पहुंच गई फिर और उसने कुछ छलांगे लगाई थी वह अब पानी के कुछ दूर बह रही थी हवा खुश्बू लिए उसने देखा तो चारो तरफ कुछ अलग ही नजारा था बड़े-बड़े पेड़ थे बड़े-बड़े लोग थे परंतु कितनी देर वहां रह सकती थी? ली उसने धरती पर पहली सांस पर था मुश्किल लेना वहां सांस वह जल की रानी थी जल में सांस लेने वाली जल में तैरने वाली जल में ही जीने वाली वह ले सकती थी सांस केवल जल में घुली हुई ऑक्सिजन वह लगी छटपटाने घबराने लगा उसका दम घुटने जैसे दबा दिया हो गला उसका वह लगी उछलने जैसे वह तैरना भूल गई हो
मां ने कहा था धरती पर तैरा नहीं जा सकता ना ही हम वहां चला जा सकता वह घबराकर फुदकी लेकिन वह तैरा नहीं सकती थी वह चल नही सकती थी वहां जमीन थी वह कठोर थी कोमल मछली रानी का शरीर छिलने लग गया
पानी मे बड़े बड़े अच्छे गोते लगाने वाली वह सबकी प्यारी मछली रानी अब धरा पर वह झटके खाकर उछल रही थी घबरा रही थी रोने को चाहती थी लेकिन पछता रही थी उसने किसी की सलाह जो नही मानी थी।
अब वह पीछे लौटने को छलांग लगाती पर वह मामूली ही ऐसा कर पाती वह जल में जितनी छलांगे लगाती वैसे वह ना लगा पाती उसकी घुटन बढ़ती जा रही थी वह काफी थक गई थी लगा उसको सागर बहुत मिलों दूर!
वहां आकाश में उड़ रहे बाज़ के एक बच्चे की नजर उस पर पड़ी वह मछली रानी को उठाने की फिराक में था और तभी उसी वक्त गोता लगाया अगले पल मछली रानी उसके पंजों में थी अब वह धरती से आकाश में पहुंच गई थी मछली रानी और अधिक घबरा गई मां की बातें याद आ रही थी बेटी तुम शायद लौट भी ना सकोगी तुम्हें वहां कोई अपना आहार बना लेगा!
क्या मछली रानी उस बाज़ का आहार बनेगी? वह तो जल से बाहर धरती का नजारा देखने आई थी पर अब तो उसे अपनी जान का खतरा था बाज़ का भोजन बनना था वह नन्ही मछली रानी बाज़ का आहार बनने जा रही थी अब तो वह सकते में थी मुसीबत से घिरी अपने प्राण के बचाव में वह तो लौटना चाह रही थी फिर से अपने घर वहीं जहां उसका सुंदर घर था पानी में।
उसी वक्त जमीं पर किसी घर की छत पर दो बच्चे अपने पतंग को सबसे ऊंचाई पर ले जाने की होड़ में थे उनकी ऊंची पतंगे आसमां को छूने की कोशिश में उड़ रही थी
बाज़ का बच्चा मछली को खाने के लिए किसी पेड़ की तलाश में था तभी वह पतंग की डोर की चपेट में आ गया उसके पंख डोर में उलझ गए गिरने के डर से मछली रानी उसके पंजों से छूट गई मछली रानी बाज़ से तो बच गई अब वह हवा में थी वह हवा में गोते लगा रही थी अब वह जमीं पर गिर रही थी वह गिरी किसी एक घर के चौक में चौक में था पानी का एक बड़ा सा टब टब में गिरते ही उसकी जान में जान आई देख नजारा तो बच्चे वहां बाहर आए वे बड़ी खुशी से मछली को देखने लगे मछली रानी को लेकर हाथ में वे खुशी से झूमने लगे और एक बच्चा गाने लगा मछली जल में रहती है मछली उसकी रानी है जल में ही उसका जीवन है बाहर निकालो घबरा जायेगी जल में डालो तो तैरने लग जायेगी तभी बच्चों ने बाहर निकाली मछली रानी को पानी में फिर से डाल दिया। मछली रानी एक बार तो घबरा गई थी।
तभी आकाश में बादल गरजे और बरसने लगे बच्चे वहां से घर के अंदर भाग गए पानी खूब बरसा और जमीन पर गिरा पानी का टब लबालब भर गया मछली रानी टब से बाहर आ गिरी और पानी के साथ नाले में बहती बहती एक बड़े नाले में पहुंच गई फिर बड़े नाले का पानी बहता बहता मछली रानी के उसके घर समुद्र में ले गया मछली रानी बड़ी तेजी से तैरने लगी वह बड़ी तैराक थी गोते लगाते फुदकती हुई बड़ी खुशी से उमंग के साथ अपनों के बीच पहुंची।
सारे के सारे जलचर उसके इंतजार में थे जो उसके लौट न आने से दुखी थी उन्होने मान लिया था कि मछली रानी अब जीवित ना रही मछली रानी ने मां से लिपट कर रोने लगी और कहने लगी मां मां तेरा कहना मेरा नही मानना मां मां तेरा प्यार करना मेरा तुमसे दूर चले जाना मां मां अपने संसार में रहना है जैसे स्वर्ग में रहना तुमसे दूर चले जाना मुसीबत गले लगाना जल से दूर जाना मौत को गले लगाना मां में फिर कभी वहां ना जाऊंगी अब सदा तेरे साथ ही रहूंगी और तेरा कहना ही मानूंगी मछली रानी ने रोते-रोते सारा हाल कह सुनाया सारे जलचर उसको सुनते रहे तभी बुजुर्ग कछुआ बोल पड़ा अपनी मछली रानी बड़ी नन्ही सी प्यारी सी है बड़ी वह सयानी सबकी प्यारी है वह बड़ी बहादुर रहेगी अब हमेशा अपने पास ना जाएगी कभी हमसे दूर हम रखेंगे उसको यहां हमेशा खुश बड़ी प्यारी सी अपनी मछली रानी...
ऐसी थी एक छोटी मछली रानी नन्ही सी मछली रानी जल में रहती जल में तैरती... यही कहानी है मछली रानी की जो बन गई थी नन्ही प्यारी मछली से एक बहादुर मछली रानी...
By Tara Chand Saini

Comments