मंजिल की राह पे
By Rajneesh Singh Yadav
आसमान को छूने की चाह में ,
निकल पड़े हम अपनी राह पे।
मंजिल भले ही दूर है , ये रास्ता भी क्रूर है।
पर कोशिश अपनी भरपूर है,
खुदा की हमपे नूऱ है ,
मिलनी कामयाबी जरूर है।
किस्मत का ये साथ सबको नहीं है मिलता ,
पर काँटों के बिना तो गुलाब भी नहीं है खिलता।
By Rajneesh Singh Yadav

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