भूल जाना उसका
By Aarna Sandilya
देखा था मैंने उसे,
कभी सजे जोड़े में,
मुस्कुराहट के साथ,
खुशियों के साये में।
थी वो लड़की भी कभी बेफिक्र,
ख़यालों में खोई,
लोगों की अज़ीज़,
दिल की नर्म थी।
पर कहते हैं ना,
वक़्त का अपना तरीका होता है,
सीखने-सिखाने का।
अब वो सितारों के बीच,
दिखती नहीं है।
अब किताबों के बीच,
बसेरा है उसका,
अंधेरों की मोहब्बत है उसकी।
आँखों के नीचे अब
थकान के काले सुरमा होते हैं,
गालों पर आँसुओं
की लाली होती है।
लगता है बस हर वक़्त,
किसी जंग में जा रही है,
खुद से या किसी और से पता नहीं।
शायद अभी भी भाग रही है,
या फिर खुद को झुठला रही है।
ना जाने कब से,
खुद से नफ़रत होने लगी उसे,
या दुनिया से उम्मीद रखना छोड़ दी।
कहीं,
उसने खुद को तो नहीं छोड़ दिया।
By Aarna Sandilya

Masterpiece
Great
So well written
Felt ❤️
😭😭👏👏👏👏👏👏👏