भारत की बेटी
By Neha Agrawal
रुदन कर रही है रुह उसकी
पर चेहरे पर मुस्कान है|
भारत की स्त्री- अभाग्य में घिरी
फिर भी सब कहते भाग्यवान है||
सारा बचपन बीता उसका
पिता की छत्रछाया में|
घर की इज्जत -उसके ही सर
पालने से ही समझाया है||
लाड़ मिल भी जाए भाई जितना
आजादी कहां मिल पाती है?
समाज के डर से माता उसको
झूठी सांत्वना दिलाती है||
तेरे घर जाए जब तू,
आजाद है - जो करना हो|
पराई अमानत है तू अभी
समझ कर कर जो करना हो||
पैदा हुई जहां वह घर- पराया
जहां आई वहां भी- परायापन है|
भारत की नारी -स्वयं की विधाता
फिर भी कहता हर विज्ञापन है||
शादी के बाद भी कहां
आजादी उसे मिल पाती है?
भारत आजाद हुआ भले ही
वह पराधीन ही पाई जाती है||
पति के कुटुंब की जिम्मेदारी
अब उसको निभानी है|
जाना चाहे वह खुद के लिए
ससुराल में आनाकानी है||
सुबह से शाम- सेवा में व्यस्त
फिर भी बेरोजगार मानी जाती है|
किसी की पत्नी, किसी की बहू
स्वयं अस्तित्वहीन हो जाती है||
अतिशय पीड़ा सहन माता बनती वह
बालक को मिलती -पिता की पहचान है|
भारत की माता -भविष्य की निर्माता
जगत कहता यह ‘हमारा योगदान है’||
सैकड़ों में एक अगर सफल हो
भारत का चेहरा बन जाती है|
करोड़ों सामाजिक अत्याचार से ग्रस्त
अनजान, अनसुनी ही रह जाती है||
बलात्कार शोषण होता उसका अगर
समाज उसे ही दोषी ठहराता है|
जिसने किया यह जघन्य अपराध,
समाज में बेहिचक आता-जाता है||
खुद के लिए बोले तो निर्लज्ज
ना बोले तो मिसाल बन जाती है|
शक्ति का स्वरुप भले हो परंतु
स्वयं लाचार सी हो जाती है||
जीवन व्यतीत किया औरों के खातिर
फिर भी कहां मिलता उचित सम्मान है?
भारत की बेटी- लक्ष्मी बाई की वंशज
उठ बता जग को अब- तू महान है||
By Neha Agrawal

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