बेरंग
By Jyoti Prakash Mohanty
आज रंग दे मोहे
सिर से ले कर पाँव तक
हर धूप और छाँव तक
लाल..हरा..पीला..गुलाबी..श्वेत
हर एक रंग से रंग दे..!
मेरे काँपते साँसों को
ख़ुशबूओं से रंग दे
मेरे शरीर के ठंडक को
अपनी हरारत से रंग दे
मेरे बिखरे सपनों को
ढेरों उमंगों से रंग दे
जीवन के बचे हुए क्षणों को
अपनी आकृति से रंग दे
या फिर..
अपने आग़ोश में भर ले
मेरे सारे रंग हर ले
आज मोहे बेरंग कर दे !
By Jyoti Prakash Mohanty

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