बेमन से लिखी...
By Apurva Banthia
एक अनमनी सी लिखी पंक्ति को कविता मैं कर छोडूंगा... छंदों में छिपे... पद्यों में लुपे... कथनी के भांडे फोडूंगा... एक अनमनी सी लिखी पंक्ति को कविता मैं कर छोडूंगा... सुर-साज़ तले... लफ़्ज़ों से बने... शेरों की ग़ज़लें जोड़ूंगा... एक अनमनी सी लिखी पंक्ति को कविता मैं कर छोडूंगा...
मापक की है समझ किसे... क्या उपमा, अनुप्रास कहाँ... आज छिछोरा कवि में बनके... लय की बाँह मरोडूंगा... एक अनमनी सी लिखी पंक्ति को कविता मैं कर छोडूंगा... तासीर जो 'गर हो पानी सी... बूंद बूंद औ' लहर लहर... शब्दों की नदियाँ मोडूंगा... एक अनमनी सी लिखी पंक्ति को कविता मैं कर छोडूंगा…
By Apurva Banthia

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