बेटी एक अनमोल रत्न
By Vijeta
कुछ अनकहे से सवाल हैं मन में जिनके साथ तू सो जाती है
तेरी ये नम आँखे सब कुछ कह जाती है
तू सब समझ जाती है
क्यूँ आती हैं ये उलझने पूछती है तू हमेशा
बहुत कुछ सीखा कर जाती है
तू सब समझ जाती है
इसके जैसी उसके जैसी
नहीं है तू किसी के जैसी
अपनी पहचान तू ख़ुद बनाती है
तू , सब समझ जाती है
इतना प्यार तू करती है
घर में ख़ुशियाँ बिखराती है
एक पल भी चुप हो जाए तो
मन में हलचल सी मच जाती है
तू, सब समझ जाती है
मेरे चेहरे को मिनटों में पढ़ लेती है
अपना दिल थाँब के बाँहो में भर लेती है
तू, सब समझ लेती है
कुछ देर खेलना चाहती है
बहुत कुछ कहना चाहती है
बस इन्ही लम्हों में तू सिमटी सी रह जाती है
तू सब समझ जाती है
देख जीवन ने क्या दिया है हर पल अनोखा है
ना रोक तेरी मासूमियत को कल किसने देखा है
ना समझ इतना की शरारतें कम हो जाए
तू सब समझती है हम कहते ही रह जाए …
By Vijeta

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