बेचैन लबों की अदाकारी न देखी
Updated: Jul 19, 2025
By Shriram Bharti

बेचैन लबों की अदाकारी न देखी
तुमने मेरी समझदारी न देखी
तसल्ली से रोने का मन भी नहीं करता
हिज्र में ऐसी लाचारी न देखी
ये क्या हो गया मुझको न जाने
चेहरे पर खुशी एक बारी न देखी
देखे होंगे बेशक मंज़र और भी मैंने
मगर तुझ सी कभी कोई प्यारी न देखी
मरने को रोज़ संवरता हूं शीशे के आगे
कभी ऐसी तयारी न देखी
टूट कर न उगते हों फूल फिर जिस बाग़ में
मैंने कभी ऐसी क्यारी न देखी
आंख उठाने का भी हक खो दिया है
किसी मोहब्बत में ऐसी दरारी न देखी
काट दे इस दर्द को मेरे देह से जो
बाज़ार में ऐसी आरी न देखी।
By Shriram Bharti

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