बे नाम एहसास
- Hashtag Kalakar
- Nov 29, 2025
- 1 min read
By Khushbu Vandawat
कुछ बातें जो लफ़्ज़ों में नहीं आती,
वो भावनाएँ जो लिखी नहीं जाती।
ना कोई एक एहसास है,
ना तेज़ दिल की धड़कन,
बस वो एक अजीब सी हलचल।
शायद किसी को खोने का ग़म है,
या कुछ ना पाने का दर्द है।
बस वो एक अजीब सी हलचल।
आँखों में आँसू हैं,
दिल में कोई गहरी बात।
एक एहसास जो बाहर निकल नहीं पाता,
वो दर्द जो जताया नहीं जाता।
वो एक अजीब सी हलचल,
खुद से बात करने में नाकाम करती है,
पर मेरी कलम उसे बाहर लाने की बेइंतहा कोशिश करती है।
खुद को खो चुकी हूँ,
समंदर की लहरों में डूब चुकी हूँ।
दुख है, ग़म है इस बात का कि ग़म है मुझे किस बात का।
वो अजीब सी हलचल मुझे हैरान परेशान करती है,
मानो अपनी एक कहानी सुनाना चाहती है।
वो बे-नाम एहसास।
By Khushbu Vandawat

Well done
Very nice poem
Nice
amazing