बुराई-अच्छाई
Updated: Jul 18, 2025
By Kshitij Kawatra

अपनी सच्चाई मैं जानता हूँ
बुराई-अच्छाई मैं जानता हूँ
रहता उसकी रज़ा में पर
थोड़ी चतुराई मैं जानता हूँ
पैसे की ज़रूरत किसे नहीं
पर नेक-कमाई मैं जानता हूँ
हाँ अपने हक़ का चाहिए मुझे
पर हक़-ए-आशनाई मैं जानता हूँ
फ़र्ज़ हैं मेरे कुछ हिस्से के
वरना, पारसाई मैं जानता हूँ
बा'द-ए-वस्ल क्या कह सकूँगा
के रंज-ए-जुदाई मैं जानता हूँ
इक तेरा ही मुरीद होना मुझे
यूँ तो ना-खुदाई मैं जानता हूँ
बादशाही का क्या करना मुझे
अब जो गदाई मैं जानता हूँ
By Kshitij Kawatra

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