बुढ़ापे का सहारा
Updated: Jul 16, 2025
By Asha Rani Sharan
बुढ़ापे का सिर्फ लाठी ही नहीं सहारा
इच्छा शक्ति और धैर्य है बुढ़ापे का सशक्त सहारा
जीवन के सफर का अनमोल एहसास
जब कोई भी नहीं होता हमारे आस-पास
आशा की किरणें देती सुखद एहसास
साहस की डोर थामें, निडर हो करो वास
सालों की डोर से बंधा मन की राह पर कोई चिन्ह
गुजरे हुए समय को देखें तो आज है बिल्कुल भिन्न
रात की चादर में लिपटे हुए दिन के सपने
जीने का सहारा अब तो यही हुए अपने
अभी तक बुझी नहीं आशा की नन्ही चिंगारी
सुख दुख की कहानियाँ हो गयीं कितनी पुरानी
हर घड़ी ने छेड़ा है, अनगिनत गीत
यह बुढ़ापा भी है जीवन की एक अजीब रीत
शरीर की थकावट, पर मन में गहराई
जीवन ने लिया है समय की राह पर
एक बार फिर से नूतन अंगड़ाई
बुढ़ापे का सिर्फ लाठी ही नहीं सहारा
इच्छा शक्तिऔर धैर्य है बुढ़ापे का सशक्त सहारा
By Asha Rani Sharan

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