बातें
- Hashtag Kalakar
- Dec 12, 2025
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By Manmohan Kaur
कितनी बातें करनी हैं मुझे
कितना कुछ कहती भी हूं
फिर भी अपने आप को क्यों भूल जाती हूं
वक्त निकल ही लूंगी कभी
कोई ना भी सुने मेरी बातों को
सामने बैठकर उस आईने को कह दूंगी
कहूंगी उसको, मेरी बातें गहरी हैं
कुछ बातें समझने की
कुछ बातें विश्वास की
कुछ किसी भी काम की नहीं
क्योंकि जरूरी नहीं जो मैं सोचूं वह तू भी समझे
सुन तो लेगा ना तू,
देख तू चटक मत जाना
मेरे अंतरमन के द्वंद में उलझ ना जाना
हां कुछ ही नहीं ढेर सारी बातें करनी है मुझे
जवाब तेरे पास नहीं
जवाब मेरे पास भी नहीं
फिर भी एक तसल्ली है
तूने सुन लिया और मैंने कह दिया
खुश रहने के लिए बस इतना ही काफी है
अपनों की बात उस आइने की तरह सुन लो
दो घड़ी अपनों को भी चुन लो
By Manmohan Kaur

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