बातें
By Akanksha Mishra
बातों से अब जी नहीं भरता,
बातें सब बेमानी लगती हैं,
हवा पर बने महलों के किस्से,
सब झूठी कहानी लगती है।
बातों से नियत जाने कौन,
मिलने वाला क्या लाया है?
फूलों का ताज या कांटों का आसन
बातों से पहचाने कौन?
पेश किये जो थाली में,
हीरे मोती लाया है,
बातों से कैसे जानोगे,
कि एक हाथ में खंजर भी लाया है,
शहद सी मीठी बातें ले कर
जो प्रेम के छंद पढ़ता है
मतलब भर का साथ निभा कर
वो फिर एक नई कहानी गढ़ता है।
नई नहीं ये खोज कोई
ये पहले भी कहीं सुना था क्या?
के कसमें वादे प्यार वफ़ा सब
बातें हैं बातों का क्या?
पर बातों की उमर बड़ी लंबी है
मोहब्बत भरी एक बात कोई
जाने कब किस ग़म में राहत देती है
बचपन में कहीं माँ की बातें
सबसे लड जाने की आज भी ताकत देती है।
बुझे हुए से रूठे दिन में
एक महफ़िल याद सी आती है
कुछ दोस्त वो जिस्में,
खूब हंसी थी
और कुछ बेफिक्र सी बातें थीं।
तो बातें जरा संभल कर करिये
हो दिल से निकली, कुछ प्यार भरी
वज़न सच का भी कुछ ज़्यादा रखिये
क्यूंकि,
बात निकली है तो दूर तक जाएगी
कुछ साल रहेंगे हम या तुम
पर बातें कुछ दिन और रह जाएंगी।
By Akanksha Mishra

Amazing lines
Baatein hain...baaton ka kya...
👍👍
So clear presentation of thoughts 🔥
Kya mast likha hai yaar