बांवरी
- Hashtag Kalakar
- May 20, 2024
- 1 min read
Updated: Oct 2, 2024
By Anu - AnmolChahat
मन चंचल मन बांवरा इत उत बहका जाए,
अंधियारी है मोरी अटरिया यहां दीपक कौन जलाए।
जबसे दूर गए हो छलिया भावे ना दिन रैन,
व्याकुल हो गए नैना मेरे खोया खोया चैन,
तुमसे बिछड़ना दिल को मेरे पल पल है तड़पाए,
अंधियारी है मोरी अटरिया यहां दीपक कौन जलाए।
सूनी सूनी गलियां लगती,सूने पड़े घर द्वार,
दिन महीना सब कुछ भूले,भूले तीज त्यौहार,
तुझे ढूंढती हैं अंखियाँ मेरी,बस एक झलक मिल जाए,
अंधियारी है मोरी अटरिया यहां दीपक कौन जलाए।
दिन गिन गिन कर गिनती भूली,राह तकत थके नैन,
केही विधि तुझको पुकारूँ छलिया,निकरे ना मुख से बैन,
तुझ बिन किसको चाहूं तो कैसे,कोई मन नहीं भाए,
अंधियारी है मोरी अटरिया यहां दीपक कौन जलाए।
By Anu - AnmolChahat

Comments