बहुत थे
By Deeptej Singh
तुमने अच्छा किया जो हमें छोड़ दिया
हम तो खुद से ही परेशान बहुत थे,
लोगो की मीठी मीठी बातों में फस जाया करते थे
हम उम्र में तो बड़े थे लेकिन नादान बहुत थे,
उम्रभर सहता रहा दुःख अपनों के हिस्सों के
जब सुखों की बारी आई तो कतार में इंसान बहुत थे,
मैं किसी राजा की सत्ता के हक़ में नही था
जिस देश में तू जा कर बसी वहां हुक्मरान बहुत थे,
मैंने उससे कहा कि आस्मां के चाँद में बस तू दिखाई देती है आजकल
उसने कहा हमारे शहर में तो आसमान बहुत थे,
मैं ताउम्र लड़ता रहा निहत्था बिना किसी हथियार के
पीछे मुड़ा तो देखा मेरे अपनों के हाथों में तीर कमान बहुत थे,
हम दुआ करते रहते थे साथ मिलकर रहने की कभी ना छोड़ कर जाने की
ऐसी कई कसमें खाने वालों की कब्रों से भरे शमशान बहुत थे,
By Deeptej Singh

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