"बसंतर व्रतांत"
Updated: Jul 8, 2025
By Ojeshwini Rajput
आओ तुम्हें बसंतर के रणांगण का दृश्य दिखलाती हूँ,
भारत के उन वीरों का जंगी मिज़ाज बतलाती हूँ।
इकहत्तर जिसके स्वर्णिमविजय पर तुम, हर्षोलास मनाते हो;
उसके पीछे के साहस का मैं तुमको, इक व्रतांत बतलातीहूँ ॥
नापाक प्रयोजन लेकर जब बैरी,बसंतर पर आकर छाए थे;
सत्रा-पूनाहॉर्स के वीर भी तब उनसंग रणांखेट खेलने आएथे।
तेरा-लेन्सर के पैटन ले अरीदल, ब्रिज-हेड संघारने आए थे,
किंतु भारत के वीरों से वे पार कभी ना पाए थे ॥
परमवीर-खेत्रपाल जब उनके समक्ष आए थे,
भीषण गोलाबारी में भी वे युद्ध भारत-पक्ष कर लाए थे।
अग्नी-अर्घ टैंक हो धधका, फिर भी ना घबराएँ थे,
अंतिम-स्वास देह में जब-तक,तब-तक लड़कर आएथे ॥
इसप्रकार भारत के नाम विजय ये,
पराक्रमी वीर कर आएथे।
कुछ इसप्रकार ही,शौर्य भारत का ,
ये इति-पृष्ठ-अमर कर आएथे ॥
By Ojeshwini Rajput

Comments