बलात्कार एक कलंक
By Priyanshu Ranjan
इन दरिंदो ने मुझे तब जकड़ा जब मैं सो रही थी इन्होंने मुझे तब भी नही छोड़ा जब मैं दर्द से रो रही थी पहले मैं पहले मैं वो ये बात बोल रहे थे धीरे धीरे मेरी इज्जत को टटोल रहे थे इस घटना के बाद मेरी जिंदगी बदनामी में कट रही थी एक कमरे के कोने में मैं डरकर सिमट रही थी घटना होने के बाद दो चार दिन तक लोग हल्ला बवाल करते रहे,मीडिया वाले आकार उस पीड़ित से क्या हुआ कैसे हुआ ये सवाल करते रहे दो चार दिन बीतने के बाद जाने क्यों हमारा समाज मौन था और पूछो की जिसने बलात्कार किया उसे सजा मिली तो लोग कहते है
सजा क्या है और दोषी कौन था हर वक्त हमारे कपड़े के बारे में बोला जाता है तो आज मैं आपसे पूछता हूं की कपरे अगर गलत पहनने के कारण बलात्कार होता है तो दो साल पांच साल की बच्चियों का इज्जत क्यो टटोला जाता है इस घटना के बाद मेरी आंखे छोड़ो मेरा दिल रोने लगा है क्या पिता क्या भाई मुझे पूरी मर्द जाती से नफरत होने लगा है मां आप कहती है अच्छा है समाज तो कहा गए अच्छे लोग ये लोग बना रहे थे वीडियो जब वो लोग मुझे दे रहे थे चोट और बलात्कार से मरने से तो अच्छा होता की मां पैदा होते ही तू मेरा गला देती घोट आज फिर कोई बच्ची अकेले घर में सो रही है आज फिर एक मां बेटी के लाश के सामने बैठकर रो रही है आज फिर एक बेटी मर के कर गई मां की कोख को सुना आप बताइए क्या बेटी होना है इतना बड़ा गुनाह अब कैसे कभी कोई मां अपनी बेटी के बाहर जाने के बाद घर वापस आने की आस लगाएगी जो लोग बलात्कार करते है क्या उन्हे नहीं पता की एक दिन उनकी भी बेटी ऐसे ही मारी जायेगी ।। ऐसे मर्द बनो जो किसी लड़की पर कभी गंदी नजर न डाले दूसरे की बहन बेटियों को मुश्किल से निकाले और आपको देखकर कोई लड़की अपना दुपट्टा नही संभाले ।।
By Priyanshu Ranjan

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