बर्बादी
By Vinodini Rajan
कहा था तुमने की फुर्सत से मिलेंगे तुम्हे, अभी नहीं, जब फ़ुर्सत मिले तो मिल लेना , सुना है ख़ामोश रिश्ते ज़्यादा देर जिंदा रहते नहीं । मुक़द्दर की शरारत तो देखो, मुझे याद करने की तुझे मोहलत न मिली, और मुझे तेरे ख्याल से निकलने की, सीरत न मिली । कभी रूठ जाओ अगर हमसे तो बता देना, अब हमे मनाना आता नहीं , तुम भूल जाना चाहो हमें तो भूल जाना, हमें तो भूल जाना भी आता नहीं । चुप है किसी सब्र से हम, तुम नाराज़गी न समझ लेना, दिल पे असर हुआ है तेरी हर बात का, तुम मेरी बेअदबी न समझ लेना ।
कुछ उलझे हुए सवालों से डरता है दिल,
न जाने तन्हाईयों मैं क्यों बिखरता है यह दिल,
किसी को पाने की कोई चाहत तो नहीं,
पर तुझ से बिछड़ने से क्यों डरता है यह दिल ?
तुम सब से अज़ीज़ सजा हो मेरी
हम साथ हैं तो उफ़ क्या खूब आफत हैं, की नहीं?
आज बहुत दिनों बाद महक हवाओं में है,
तुम्हे फुर्सत मिल ही गयी हमे याद करने की, लगता है असर मेरी दुआओं में है ।
मिल जाए तुम्हे जब फ़ुर्सत कभी,
बता देना की फुर्सत में भी तुम्हे याद आने लायक, हम हैं भी, कि नहीं ।
कौन कहता है की मिलना - बिछड़ना तो किस्मत की बात है,
मेरी अपनी बर्बादी में तो, मेरा ही हाथ है ।
By Vinodini Rajan

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