फरियादी
- Hashtag Kalakar
- Jan 23, 2025
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By आकांक्षा
न्याय पाने कि चाह में क्या क्या नहीं गवाया, बिक गई जमीन सारी, गिरवी पड़ा हैं मकान मेरा बस ये शरीर बचा हैं जो न्याय का अभिलाषी हैं। मुख मौन क्यों पडे़ अदालतो के इस फरियादी को बताए कोई। क्या न्याय कि मुरत बिक गई , सुरत देख इन कौड़ियों कि। न्याय मिलेगा मुझे पूछे किससे ये फरियादी फटी पड़ी चप्पलें इनको ठीक कराऊ या दफना दू न्याय कि तरह अब घिसने की इनकी उम्र नहीं।
आँखों पर पहनी काली पटी को तन पर पहनाये कोई, किस झूठे सच के लिए ये लड़ रहे वकालत धारी । कुछ तुले हैं सच के तराजू में पर दब गए झूठ के भारीपन से । मुँह सीले पड़े हैं इनके झूठ के आगे इन न्याय के ठेकेदारो को गीता पढ़ाएँ कोई।
सच्ची धाराओं के आड़े झूठ को सच साबित कर देते ये काले कोट के अधिकारी इन्हें संसोधन कर पढ़ाएँ कोई 432 पेन कि स्याही यूहीं खर्च नहीं हुई ये इन्हें बताए कोई। अब 432 पेन का मोल एक हस्ताक्षर से लग जाता हैं। भरी तिजोरी के आगे न्याय बिक जाता हैं, न्यायाधीश के एक हस्ताक्षर से केश बंद हो जाता हैं, पैरवी करने वालों के मुँह सील जाते हैं, ये फाइल न्याय के रखवालों के सर्दी में तप के काम आती हैं, मुखाबिर बन तमाशा देखते रहते हैं न्यायालय के पेहरेदारी। जानता हैं सारा तन्त्र इस षड्यंत्र को पर मुँह सीले रहते हैं चन्द कौड़ियों के ढेर पर। हम न्याय के पुजारी हैं इतिहास पढ़ाएँ कोई, इस समाज का सच से मिलन कराएँ कोई न्याय कि परिभाषा समझाए कोई। लड़की पर हुए अत्याचार कि सुनवाई कि तारीख दे दी जाती हैं, पैसों के दम पर खुद को बड़ा बताने वालों के आधी रात न्यायलय खुलवा कर बैल दे दी जाती हैं। सारे सबूत मिट जाते हैं, ये लोग जो मोमबत्ति कि लौ पर न्याय दिलाना चाहते हैं क्यों नहीं अन्यायी कि चिता जलाते हैं जरा ताकत ये राजनीति वाले वहाँ लगाते हैं सायद किसी बेटी को न्याय मिल जाए ऐसा ये न्याय के रखवाले क्यों नहीं सोच पाते हैं। मेरी चिता बुझने से पहले अपराधी रियाह हो जाता हैं क्या यही संविधान कि ताकत हैं। अक्सर गरीब पीछे हट जाता हैं, लड़की का पिता अन्याय के आगे झुक जाता हैं न्याय नहीं मिलेगा समाज साथ नहीं देगा अपनी बेटी चिता के पास यही दोहराता हैं। लाखों फाइलें आज बन्द पड़ी हैं, लाखों कब्र से न्याय कि पुकार उठ रही कई आवाजे घरों में बंद रखी हैं, चिताओं के अंगारे बुझे नहीं हैं न्याय कि राह में आज भी ध्धक रहे हैं। इसलिए......
मैं फरियादी फरियाद यही करती हुँ, मुझे न्यायलय में न्याय दिलाएँ कोई।
By आकांक्षा

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