फ़िर उनका स्नेह
By Vikas Kumar
फ़िर उनके पास आना चाहता हूं।
फ़िर उनका स्नेह पाना चाहता हूं।
उन नयनों की वो हसीन गुलशन।
उन अधरों की वो नमकीन शबनम।
फ़िर उस गुलशन में जीना चाहता हूं।
फ़िर उस शबनम को पीना चाहता हूं।
उन्हें निः शेष हो चाहूं अभय मैं।
उन्हें निर्निमेष हो देखूं अभय मैं।
फ़िर उनके गोद में सोना चाहता हूं।
फ़िर उनके यादों में खोना चाहता हूं।
लिपट कर आज रोना चाहता हूं।
उन्हेें अश्कों में भिगोना चाहता हूं।
सफ़र कितना बेज़ार है, उनके बिन।
ये हयात इक आजार है, उनके बिन।
सफ़र ये हसीन बनाना चाहता हूं।
मैं उनके कुछ पल चुराना चाहता हूं।
फिर उन्हें कभी न जाने देना चाहता हूं।
हयात उनके साथ हीं बिताना चाहता हूं।
बस उनके साथ हीं जीना चाहता हूं।
बस उनके साथ ही मरना चाहता हूं।
By Vikas Kumar

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