प्रेम की महिमा
By Dr C M Gupta Atal
प्रेम नहीं बिकता हाटों बजार में. प्रेम नहीं मिलता ईंटों पहाड़ में. प्रेम नहीं दिखता है शत्रु गैर में. प्रेम नहीं दिखता है ईर्ष्या बैर में. प्रेम दिखा है सुखद प्रभो के टेर में. प्रेम दिखा सबरी के झूठे बेर में.
प्रेम दिखा राधा की सच्ची प्रीत में.
प्रेम दिखा मीरा के भक्ती गीत में.
प्रेम दिखा है कृष्ण सुदामा मीत में.
प्रेम दिखा है सूरा पदों पुनीत में।
प्रेम दिखा कौशल्या के मातृत्व में।
प्रेम दिखा है जसुदा के लाडत्व में।
प्रेम दिखा है राम भरत भ्रातत्व में।
प्रेम दिखा बजरंगी के दासत्व में।
प्रेम पाक जज्वा पावन अहसास है।
प्रेम से पनपा करता हर विश्वास है.
प्रेम से उपजा करती श्रद्धा ख़ास है।
प्रेम में पाया जाता प्रभु का वास है।
प्रेम दवा है रोग नहिं यह सुन लेना।
प्रेम दया है क्रोध नहिं यह सुन लेना।
प्रेम त्याग है भोग नहिं यह सुन लेना।
प्रेम सत्य है शोध नहिं यह सुन लेना।
मुझे प्रेम का लगता रूप महान हैं.
प्रेम ही पूजा सर्वगुणों की खान है.
प्रेम प्रभो का दिया हुआ वरदान है।
मुझे प्रेम में दीख रहा भगवान है.
By Dr C M Gupta Atal

Comments