प्रेम का कोई रूप नहीं!
By Monika Jayesh Shah
प्रेम का कोई रूप नहीं!
प्रेम कोई आकार नहीं!
प्रेम तो प्रेम हैं!
दो दिलों का मेल हैं!
जोड़ी तो ऊपर वाला
बनाता हैं!
ये तो ईश्वर का खेल हैं!
में शमिऀली शांत!
मेरा जीवन हैं सादा!
तू मिला जबसे मुझे!
मन में प्यार खिल गया!
कमल के फुल सी मुस्कान
तेरी खुशी मेरा सम्मान!
दो दिलों की दास्ता!
प्यार में बदल गई!
में तेरी दीवानी!
तू मेरा दीवाना!
मेरे हाथों की मेहंदी
का रंग नया!
जीवन का रंग नया
प्यार नया!
अपने प्यार की खुशबू से!
मेरा जीवन महका दे!
प्रेम तुझा आनि माझा असाच असावा!
प्रेम दिसावा पन अंतरमन पासून आपले हृदयात असावा!
मनात मनात गुलगुल प्रेम असावा!
न कलत एक दूसराचे मनाचा स्पऀश असावा!
प्रेम तुझा आनि माझा असाच असावा!
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By Monika Jayesh Shah

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