प्रिय की घर वापसी
By Bhumika Haritwal
आज फिजाओं में बसी है फूलों की कोमल मुस्कान,
उस पवन संग नाची तितलियाँ,
मानो किसी मौन संदेश की भाषा में कह रही हो --
"वह आने वाला है।"
आँगन में रखे दीप आज कुछ अधिक उजले है,
जैसे हर लौ में प्रतिक्षा की थरथराहट हो।
फूलों से सजाया घर,
पर महक तो उसकी यादों से आयी।
रंगोली के हर रंग में उतरी उसकी झलक -
लाल जैसे उसका स्नेह,
पीला जैसे उसकी हँसी की उजास।
और जब द्वार पर पवन ने दस्तक दी,
मन ने कहा --
"शायद वह आ गया।"
उस क्षण दिये मुस्कुरा उठे,
आँगन झूम उठा,
जैसे स्वयं ऋतु ने मेरे आँगन प्रवेश किया हो।
By Bhumika Haritwal

Comments