प्रकृति
By Monica Banerjee
पर्वतांचल की धुंध भरी भोर
शाखों की गौरवमई होड़
पत्तों के इस उन्मादी कोहराम को
आगोश में कोई भरे भी तो कैसे?
मन भ्रमित तो अवश्य है
पर आँखें फिर भी पगडंडी पर गड़ी हुयी ....
फिसलने का खौफ़ मुझे नहीं
पर जब तक रहनुमाई सखा नहीं
नज़रों को उठाने की भी चाह नहीं
प्रकृति तुझे आगोश में लेने की प्रबलता
आलिंगनबद्ध करने की लगन
इच्छा मात्र बनकर न रह जाये....
By Monica Banerjee

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