प्यारी माँ
Updated: Jul 30, 2025
By Asha Rani Sharan
लाख दुखों से पीड़ित हो मन
चिंता से अति बोझिल हो मन
मुंह से बोल न फूट रहा हो
कुछ करने को नहीं सूझ रहा हो
उसकी गोद में सिर रखते ही
सुख शांति आराम मिले
राहत और सुकून मिले
भटके मन को राह मिले
बालों में जो उंगली फिरायॆ
थकी पलकों में नींद आ जाए
बिन कहे सब बात समझती
चाहत से पहले पूरी कर देती
चेहरे की भाषा पढ़ लेती
कभी ना थकती कभी न रुकती
सब की सेवा में तत्पर रहती
त्योहारों के अवसर पर
खूब पकवान बनाती है
पति को खुश रखने को
पूरा उत्साह दिखाती है
बच्चे घर से बाहर रहते
उन्हें याद कर रोती है
वही तो हम सबकी माँ होती है
दूजा कोई नहीं हो सकता
भाग्यवान है, वो सब धरती पर
जिनकी अपनी माँ होती है
By Asha Rani Sharan

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