प्यार की बूंदे
By Renu singh
हथेली पर लिए कुछ बूंदें प्यार की,,,,
आहिस्ता आहिस्ता चलते जा रहे है।।
बिखर न जाए ठोकर से कहीं,,,,
किनारे से लगके चले जा रहे हे।
सूख न जाए तपती धूप में ये ,,,,
आंचल से इसको ढके जा रहे है।
हवाओं के रूख से डगमगा न जाए,,,,
मुकम्मल सहारे दिए जा रहे है।।
यूं ही कुछ कौशिशो के जाल बुनते ,,
हर सवाल का जवाब बनते जा रहे है.....
वक्त की बेरूखियो मे उलझे,
अक्स को खुदके भूलते जा रहे है....
क्यो न नजर हटाकर लोगो से,
फिर रूबरू हो लूं रूह से अपनी...
..... दिन तो ये यूं ही, गुजरते जा रहे है।।
By Renu singh

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