पोस्ट- मास्टरजी
- Hashtag Kalakar
- Oct 18, 2022
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By Prateek Saini
कदमों की जंग जीत कर लगभग लड़खड़ाते हुऐ मोहन जी ने दुकान में कदम रखा। कहा जाता है मोहन जी एक समय गांव के मुख्य पोस्टमास्टर रह चुके हैं। अपने मीठे और मिलनसार स्वभाव से उन्होने हर किसी से घर तक का रिश्ता बना लिया था। ये बातें उन दिनों की हैं जब गांव में कोई भी उत्सव त्योहार हो या किसी के घर में कोई भी प्रसंग, मोहन जी ही मुख्य महमान हुआ करते थे। पत्नी और एक बेटे का साथ ही मास्टर जी की ज़िंदगी थी।मास्टर जी बेहद सरल चरित्र के इंसान थे। लंबे और खुले पैजामे पर खाकी पहने मोहन जी का आना ये संदेश होता था के कोई समाचार आया है।पूरी ज़िंदगी बेटे को आदर्शों और मेहनत का चरित्र समझाकर इस लायक बनाया के वो इस गांव की तरक्की के लिए वो करे जो सरकार शायद कभी नहीं कर पाती।
पर कहते हैं ज़िंदगी कभी कभी हमसे वो मांग लेती है जिसके लिये हम कभी तैयार नहीं हो सकते। पूरी ज़िंदगी जिस गांव की खुशहाली में मोहन जी खुश रहे उसी गांव के दंगों में उन्होने अपने बेटे को खो दिया। जिस पल उसकी खून से भरी लाश उन्होने देखी, मोहन जी का जीवन और आदर्श सब बदल गये। कुछ पल के लिये वे ऐसे मौन हो गऐ मानो बेटे के साथ ही देह त्याग देंगे। आज इतने साल बाद भी मोहन जी मौन हैं।रोज़ मन में उठे हज़ारों संघर्षों के बीच खामोश पोस्टमास्टर जी खुद को यकीन नहीं दिला पाऐ हैं के आदर्श आज भी इंसान की जात से सस्ते ही हैं।
By Prateek Saini

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