पूनम की रात
By Parul Bhargava
जहाँ एक उम्र गुज़ारने के बाद
दो व्याकुल मन का
हो रहा था पुनर्मिलन
छूटी हुई रिक्त संवेदनाओं में
कुछ रंग भरने के लिए
वहीं एक लम्बे समय के बाद
खिड़की की कोरों से
झांक रहा था चाँद
नव सृजन की भंगिमाओं को
कुछ अधिक चंचलता लिए हुए
कैसा अद्धभुत संयोग था
पीड़ा के बादल छँटने को थे
और......
हर्षित मन के साथ
अठखेलियाँ कर रही थी
पूनम की वह रात......॥
By Parul Bhargava

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